लखनऊ में फिर टला बड़ा हादसा: पेट्रोल पंप के बगल में रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग, रीजेंसी हॉस्पिटल की टीम बनी 'कैटेलिस्ट'
➤ बारूद के ढेर पर बैठा था इलाका: क्या हो सकता था अंजाम?
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज फिर एक ऐसी ही दहलाने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले और स्थानीय निवासियों की सांसें अटका दीं। विकास नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत जगरानी हॉस्पिटल के ठीक सामने स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप परिसर में बने 'पंजाबी फ्लावर्स रेस्टोरेंट' में अचानक भीषण आग लग गई।
यह आग सिर्फ एक सामान्य दुकान तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसकी क्रोनोलॉजी और लोकेशन इतनी ज्यादा संवेदनशील थी कि एक मामूली सी लापरवाही या चिंगारी पूरे घने इलाके को पल भर में श्मशान में तब्दील कर सकती थी।
➤ संभावित महाविस्फोट के तीन बड़े खतरे
सोचिए ज़रा, एक तरफ हजारों लीटर पेट्रोल और हाई-ऑक्टेन डीजल से भरा हुआ अंडरग्राउंड पंप, और उसके बिल्कुल बगल में आसमान छूती आग की लपटें! अगर यह आग समय रहते काबू में न आती, तो इसके परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे:
1. पेट्रोल पंप ब्लास्ट: अगर आग की लपटें फ्यूल टैंक या डिस्ट्रीब्यूशन नोजल तक पहुँच जातीं, तो एक ऐसा भयानक चेन-रिएक्शन (Chain Reaction) शुरू होता जिसे संभालना फायर ब्रिगेड के लिए भी नामुमकिन था।
2. अस्पतालों पर संकट: घटनास्थल के ठीक सामने और पास में जगरानी हॉस्पिटल और रीजेंसी हॉस्पिटल स्थित हैं। इन अस्पतालों में सैकड़ों गंभीर मरीज आईसीयू और वेंटिलेटर पर भर्ती हैं। आग का जहरीला धुआं और संभावित ब्लास्ट इन बेकसूर मरीजों की जान को सीधे खतरे में डाल सकता था।
3. घनी आबादी: विकास नगर का यह पूरा इलाका एक प्रमुख कमर्शियल और रेजिडेंशियल हब है, जहाँ हर वक्त सैकड़ों लोगों और वाहनों की भारी आवाजाही रहती है।
➤ रीजेंसी हॉस्पिटल की फायर टीम: जब फरिश्ता बनकर उतरे सुरक्षाकर्मी
घटना की सूचना मिलते ही विकास नगर और गुड़म्बा थाने की पुलिस बल तुरंत मौके पर दौड़ पड़ी। लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के पहुंचने से पहले, जो असली 'हीरो' साबित हुए, वह थे रीजेंसी हॉस्पिटल की फायर सेफ्टी टीम के जांबाज कर्मचारी।
हॉस्पिटल प्रबंधन और उनकी इन-हाउस सुरक्षा टीम ने बिना एक पल गंवाए अपनी 'फायर फाइटिंग सर्विस' और आधुनिक उपकरणों को बाहर निकाला। अपनी जान जोखिम में डालकर इन जांबाज कर्मियों ने पेट्रोल पंप और रेस्टोरेंट के बीच एक सुरक्षा कवच (फायर वॉल) तैयार किया और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। रीजेंसी हॉस्पिटल की इस तत्परता को आज पूरा लखनऊ सलाम कर रहा है।
"फायर ब्रिगेड के आने की प्रतीक्षा किए बिना रीजेंसी हॉस्पिटल की फायर टीम ने तत्परता दिखाई। उन्होंने न सिर्फ अपने संसाधनों को झोंका बल्कि पेट्रोल पंप और धधकती आग के बीच एक अभेद्य दीवार बनाकर एक बड़े महा-विस्फोट को होने से रोक दिया।" — प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय विकास नगर पुलिस की संयुक्त रिपोर्टमुस्तैदी से आग बुझाने में जुटे रीजेंसी हॉस्पिटल के फायर सेफ्टी सुरक्षाकर्मी।
➤ सुलगते सवाल: प्रशासन की फाइलों में दफन है सेफ्टी?
हादसा टल गया, लेकिन यह घटना उत्तर प्रदेश की राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर और सुलगते सवाल खड़े करती है:
पेट्रोल पंप के ठीक बगल में रेस्टोरेंट को NOC कैसे मिली? पेट्रोलियम नियम बेहद सख्त होते हैं। किसी भी ज्वलनशील डिपो या पंप के आसपास आग (Gas Stoves/Burners) का कमर्शियल इस्तेमाल सख्त मना होता है। ऐसे में 'पंजाबी फ्लावर्स रेस्टोरेंट' को फायर विभाग और नगर निगम से No Objection Certificate (NOC) कैसे मिल गई? क्या मानकों की जानबूझकर अनदेखी की गई थी?
क्या सिर्फ कागजों पर होती है फायर सेफ्टी ऑडिट? लखनऊ में पिछले कुछ समय में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। सवाल उठता है कि क्या फायर विभाग इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जमीनी जांच करता है, या सिर्फ साल में एक बार फाइलें साइन करके खानापूर्ति कर दी जाती है?

